श्री कृष्ण जन्माष्टमी क्या है? कब और क्यों मनाई जाती है?

श्री कृष्ण जन्माष्टमी क्या है?

कृष्ण जन्माष्टमी नाम से ही स्पष्ट है कि भगवान कृष्ण जी का जन्म दिवस है। कृष्ण जन्माष्टमी हिन्दू धर्म के देव विष्णु के अवतार भगवान श्री कृष्ण से सम्बंधित है। माना जाता है कि श्री कृष्ण ने संसार में पाप और अत्याचार बढ़ जाने के कारण व राक्षसी प्रवृत्ति के राजा कंस को मारने के लिए धरती पर जन्म लिया। श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद के कृष्णपक्ष में अष्टमी को रात्रि 12 बजे हुआ।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है?

भगवान कृष्ण का जन्म कारावास में हुआ, देवता होने के कारण उनमें प्रबल शक्ति थी। राक्षस कंस को ये आकाशवाणी के माध्यम से ज्ञात हो चुका था कि देवकी की आठवीं सन्तान उसकी मृत्यु का कारण बनेगी। इस कारण अनेको नवजात बच्चों की हत्या कंस ने कराई। किन्तु जिसका विनाश निश्चित है उसे नहीं रोका जा सकता। भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी को श्रीकृष्ण का जन्म हुआ और उसी रात उनके पिता वासुदेव ने उन्हें यशोदा के पास पहुंचाया। श्रीकृष्ण का लालन पालन माता यशोदा ने किया जबकि उनकी जन्मदात्री देवकी थीं। भक्तों के रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने कृष्ण का अवतार लिया। जगत की रीत है कोई ऐतिहासिक कार्य  होता है तो वे प्रतिवर्ष उसे महोत्सव रूप में मनाने लगते हैं। कृष्णजन्माष्टमी का अर्थ है आज ही के दिन कृष्ण जी का जन्म हुआ किन्तु उसे दोबारा मनाने का कोई महत्व धर्मग्रन्थों में नहीं बताया गया है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी कब मनाई जाती है

आइए जानते हैं कि 2023 में जन्माष्टमी कब है व जन्माष्टमी 2023 की तारीख व मुहूर्त। जन्माष्टमी का त्यौहार श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मथुरा नगरी में असुरराज कंस के कारागृह में देवकी की आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी को जन्म हुए। उनके जन्म के समय अर्धरात्रि (आधी रात) थी, चन्द्रमा उदय हो रहा था और उस समय रोहिणी नक्षत्र भी था। इसलिए इस दिन को प्रतिवर्ष कृष्ण जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

भगवान श्री कृष्ण का जन्म

द्वापर युग के अंत में मथुरा में उग्रसेन राजा राज्य करते थे। उग्रसेन के पुत्र का नाम कंस था। कंस ने उग्रसेन को बलपूर्वक सिंहासन से उतारकर जेल में डाल दिया और स्वयं राजा बन गया। कंस की बहन देवकी का विवाह यादव कुल में वासुदेव के साथ निश्चित हो गया। जब कंस देवकी को विदा करने के लिए रथ के साथ जा रहा था तो आकाशवाणी हुई, हे कंस! जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से विदा कर रहा है उसका आठवाँ पुत्र तेरा संहार करेगा। आकाशवाणी की बात सुनकर कंस क्रोध से भरकर देवकी को मारने के लिए तैयार हो गया। उसने सोचा – न देवकी होगी न उसका कोई पुत्र होगा।

वासुदेव जी ने कंस को समझाया कि तुम्हें देवकी से तो कोई भय नहीं है। देवकी की आठवीं संतान से भय है। इसलिए मैँ इसकी आठवीं संतान को तुम्हे सौंप दूँगा। कंस ने वासुदेव जी की बात स्वीकार कर ली और वासुदेव-देवकी को कारागार में बंद कर दिया। तत्काल नारद जी वहाँ आ पहुँचे और कंस से बोले कि यह कैसे पता चलेगा कि आठवाँ गर्भ कौन-सा होगा। गिनती प्रथम से शुरू होगी या अंतिम गर्भ से। कंस ने नारद जी के परामर्श पर देवकी के गर्भ से उत्पन्न होने वाले समस्त बालकों को एक-एक करके निर्दयतापूर्वक मार डाला।

भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण जी का जन्म हुआ। उनके जन्म लेते ही जेल की कोठरी में प्रकाश फैल गया। वासुदेव-देवकी के सामने शंख, चक्र, गदा एवं पदमधारी चतुर्भुज भगवान ने अपना रूप प्रकट कर कहा, अब में बालक का रूप धारण करता हूँ। तुम मुझे तत्काल गोकुल में नन्द के यहाँ पहुँचा दो और उनकी अभी-अभी जन्मी कन्या को लेकर कंस को सौंप दो। वासुदेव जी ने वैसा ही किया और उस कन्या को लेकर कंस को सौंप दिया।

कंस ने जब उस कन्या को मारना चाहा तो वह कंस के हाथ से छूटकर आकाश में उड़ गई और देवी का रूप धारण कर बोली कि मुझे मारने से क्या लाभ है? तेरा शत्रु तो गोकुल पहुँच चुका है। यह दृश्य देखकर कंस हतप्रभ और व्याकुल हो गया। कंस ने श्रीकृष्ण को मारने के लिए अनेक दैत्य भेजे। श्रीकृष्ण जी ने अपनी आलौकिक माया से सारे दैत्यों को मार डाला। बड़े होने पर कंस को मारकर उग्रसेन को राजगद्दी पर बैठाया।

श्री कृष्ण रास लीला

अपने बालयकाल में श्री कृष्ण गोकुल में अपनी सुरीली बांसुरी से गोपियों को रास लीला रचाया करते है। अपनी सुरीली बांसुरी से पशु , पक्षी, वनस्पति और गोकुलवासी को अपनी धुन से मग्न करदेते थे। वह धुन को सुनकर सभी बड़े ही खुश खुशाल होते थे। सभी को कृष्ण की बांसुरी सुनना बेहद ही प्रिय लगता था। गोकुल में श्री कृष्ण राधा जी (Radha Krishna) को बहुत ही प्रेम करते थे। लेकिन गोकुल छोड़ने के पश्यात उन्होंने राधा से कहा था। की वह आज से बांसुरी बजाना छोड़ देंगे। तब से भगवन कृष्ण ने अपने प्यार के लिए त्याग कर दिया था।

श्री कृष्ण की शिक्षा

भगवान कृष्ण और उनके भाई बलराम शिक्षा उज्जैन में हुई थी। श्री कृष्ण ने कंस को मारा उसी लिए उनका अज्ञातवास ख़त्म हो गया था। उसी लिए कृष्ण और बलराम दोनों भाईओ को शिक्षा दीक्षा देने के लिए उज्जैन नगरी जाना पड़ा था। उज्जैन में दोनों संदीपनी ऋषी के विद्या आश्रम में दीक्षा एव शिक्षा लेना शुरू किया था। वहा भगवान की भेट उनके प्रिय मित्र सुदामा से हुई थी। वहा रहके उन्होंने अपनी शिक्षा और पारंगतता प्राप्त की थी।

श्रीकृष्ण की कुछ रोचक जानकारी

  • श्री कृष्ण भगवान वासुदेव और माता देवकी की आठवीं संतान थे। 
  • कृष्ण भगवान की सम्पूर्ण जीवन गाथा से यह सिख मिलती है की हमें जीवन कैसे जीना चाहिए। 
  • श्री कृष्णा रामानंद सागर कृत सीरियल बहुत ही प्रसिद्ध हुई थी। 
  • कृष्ण की बचपन की कहानी बताये तो उन्होंने सिर्फ 6 दिन की उम्र में ही एक राक्षस का वध किया था। 
  • श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध में दिया श्रीमद्भगवतगीता का ज्ञान आध्यात्मिकता के साथ साथ एक वैज्ञानिक व्याख्या भी है।  
  • श्री कृष्ण भगवान ने कलारिपट्टू की शुरुआत की थी वह आज मार्शल आर्ट के नाम से विकसित है। 
  • अपने जीवन में श्री कृष्ण ने दो नगरों की स्थापना की एक द्वारका और दूसरी पांडवो की इंद्रप्रस्थ। 

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